बिहार के भागलपुर जिले में स्थित सुल्तानगंज सनातन धर्म के सबसे पावन तीर्थों में से एक है। यहीं से विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले की शुरुआत होती है, जहाँ से लाखों श्रद्धालु पवित्र गंगाजल भरकर 108 किलोमीटर दूर झारखंड के देवघर स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंग बाबा बैद्यनाथ को अर्पित करने के लिए प्रस्थान करते हैं।
🌊 उत्तरवाहिनी गंगा का आध्यात्मिक रहस्य:
सामान्यतः माँ गंगा दक्षिण और पूर्व दिशा की ओर प्रवाहित होती हैं, किन्तु केवल सुल्तानगंज और काशी (वाराणसी) में गंगा का प्रवाह उत्तर दिशा की ओर (उत्तरवाहिनी) हो जाता है। सनातन धर्म में उत्तर दिशा को कैलाश पर्वत और भगवान शिव का निवास स्थान माना गया है। अतः उत्तरवाहिनी गंगा का जल भगवान शिव को अर्पित करने के लिए सर्वाधिक पवित्र और कल्याणकारी माना जाता है।
🕉️ महर्षि जह्नु एवं जाह्नवी गंगा की पौराणिक कथा:
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब राजा भगीरथ माँ गंगा को धरती पर ला रहे थे, तब सुल्तानगंज के इसी पावन तट पर महर्षि जह्नु अपनी कुटिया में तपस्या कर रहे थे। गंगा के तीव्र वेग से महर्षि का यज्ञ मंडप बह गया। कुपित होकर महर्षि जह्नु ने संपूर्ण गंगा को अपनी योगशक्ति से पी लिया।
इसके पश्चात देवताओं और भगीरथ की विनम्र प्रार्थना पर महर्षि जह्नु ने अपनी जांघ (उरु) को चीरकर गंगा को पुनः मुक्त किया। महर्षि जह्नु की पुत्री कहलाने के कारण ही माँ गंगा का नाम 'जाह्नवी' पड़ा।
⛰️ अजगैबीनाथ मंदिर की स्वयंभू महिमा:
गंगा के बीचो-बीच विशाल प्राकृतिक चट्टान पर स्थित बाबा अजगैबीनाथ (स्वयंभू शिव) का मंदिर स्थापित है। 'अजगैब' का अर्थ है - 'अद्भुत या अलौकिक'। मान्यता है कि यहाँ शिवलिंग स्वयं प्रकट हुआ था। सुल्तानगंज में जल भरने से पूर्व प्रत्येक कावंरिया बाबा अजगैबीनाथ की पूजा-अर्चना करता है और उनकी आज्ञा लेकर देवघर की यात्रा प्रारंभ करता है।