सुल्तानगंज में उत्तरवाहिनी गंगा से कावंर में जल भरने से पूर्व वैदिक संकल्प लेना अनिवार्य माना गया है। संकल्प का अर्थ है अपने नाम, गोत्र और कुल का स्मरण करते हुए भगवान शिव को अपनी यात्रा समर्पित करना।
📜 सुल्तानगंज प्रथम वैदिक संकल्प मंत्र (संस्कृत):
ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः श्रीमद्भगवतो महापुरुषस्य विष्णोराज्ञया प्रवर्तमानस्य...
अद्य श्री जम्बूद्वीपे भरतखण्डे आर्यावर्तैकदेशे पवित्र गंगा तीरे उत्तरवाहिनी क्षेत्रे...
[अपना गोत्र] गोत्रोत्पन्नः [अपना नाम] अहं मम सकल पापक्षयार्थं...
श्री बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग प्रीतये सुल्तानगंज क्षेत्राद् देवघर तीर्थं प्रति कावंर पदयात्रा जल संकल्पं करिष्ये।
ॐ नमः शिवाय! हर हर महादेव!
अद्य श्री जम्बूद्वीपे भरतखण्डे आर्यावर्तैकदेशे पवित्र गंगा तीरे उत्तरवाहिनी क्षेत्रे...
[अपना गोत्र] गोत्रोत्पन्नः [अपना नाम] अहं मम सकल पापक्षयार्थं...
श्री बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग प्रीतये सुल्तानगंज क्षेत्राद् देवघर तीर्थं प्रति कावंर पदयात्रा जल संकल्पं करिष्ये।
ॐ नमः शिवाय! हर हर महादेव!
🚩 जल संकल्प की ५ मुख्य विधियां:
- उत्तरवाहिनी गंगा स्नान: सुल्तानगंज सीढ़ी घाट या अजगैबीनाथ घाट पर ३ डुबकी लगाएं।
- दाहिने हाथ में जल: अपने दाहिने हाथ की हथेली में गंगाजल, अक्षत और पुष्प लें।
- गोत्र का उच्चारण: यदि अपना गोत्र ज्ञात न हो, तो सनातन धर्म के अनुसार "कश्यप" गोत्र का उच्चारण करें।
- जल उठान (कावंर अर्पण): संकल्प मंत्र पूरा होने पर शंखध्वनि के साथ कावंर को कंधे पर उठाएं।
- भूमि स्पर्श निषेध: जल उठान के बाद कावंर पात्र को देवघर पहुँचने तक ज़मीन पर नहीं रखा जाता (कावंर स्टैंड का उपयोग करें)।