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सुल्तानगंज से देवघर 108 किमी का मार्ग कच्चे बालू, कंकरीले रास्तों और सुईया पहाड़ की कठिन चढ़ाई से होकर गुजरता है। नंगे पांव चलने के कारण पैरों में छाले (Blisters), मांसपेशियों में खिंचाव और डिहाइड्रेशन सबसे आम समस्याएं हैं। उचित प्राथमिक चिकित्सा और स्वास्थ्य नियमों का पालन कर आप अपनी यात्रा को सुखद बना सकते हैं।

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👣 पैरों की सुरक्षा एवं छालों से बचाव के उपाय:

१. दो जोड़ी मोटे सूती मोजे (Double Cotton Socks)

सुईया पहाड़ और कंकरीले रास्तों पर नंगे पांव चलने पर कंकड़ सुई की तरह चुभते हैं। यदि आप २ जोड़ी मोटे सूती मोजे एक के ऊपर एक पहनकर चलें, तो अंदरूनी घर्षण समाप्त हो जाता है और छाले नहीं पड़ते।

२. यदि छाला पड़ जाए तो क्या करें? (Blister Treatment)

छाले को कभी भी सुई या ब्लेड से न फोड़ें, इससे संक्रमण (Infection) हो सकता है। छाले पर सरकारी मेडिकल कैंप से एंटीसेप्टिक मरहम (Betadine) लगवाएं और कॉटन पैड से ड्रेसिंग कराएं।

३. डिहाइड्रेशन व हीट स्ट्रोक से बचाव

श्रावण मास में अत्यधिक उमस और गर्मी रहती है। प्रति 5 किलोमीटर पर कम से कम 250 मिली शुद्ध जल, ORS घोल या नींबू पानी अवश्य पिएं ताकि शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स संतुलित रहें।

४. कंधे के दबाव व मांसपेशियों के दर्द का निवारण

कावंर के भार को समय-समय पर बाएं और दाएं कंधे पर बदलते रहें। विश्राम के समय पैरों को थोड़ा ऊपर उठाकर रखें ताकि रक्त संचार सुचारू हो सके।