सुल्तानगंज से देवघर की 108 किलोमीटर पावन पदयात्रा में भक्त अपनी शारीरिक क्षमता, संकल्प और श्रद्धा के अनुसार विभिन्न प्रकार की कावंर धारण करते हैं। प्रत्येक कावंर का अपना विशिष्ट नियम, समय सीमा और आध्यात्मिक महत्व है।
🔱 कावंर यात्रा के प्रमुख प्रकार (Types of Kanwar Yatra):
यह सबसे प्रचलित कावंर यात्रा है। श्रद्धालु सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर प्रतिदिन २५ से ३० किमी चलते हैं। रास्ते में सरकारी टेंट सिटी, धर्मशालाओं व सेवा शिविरों में रात्रि विश्राम करते हैं।
यह अत्यधिक कठोर और अग्निपरीक्षा समान साधना है। डाक बम श्रद्धालु सुल्तानगंज से जल उठाने के बाद बिना रुके, बिना सोए और बिना भोजन किए लगातार दौड़ते या तेज चलते हुए २४ घंटे के भीतर देवघर पहुंचते हैं।
यह कावंर यात्रा की सर्वोच्च तपस्या मानी जाती है। इसमें श्रद्धालु प्रत्येक कदम पर भूमि पर लेटकर साष्टांग प्रणाम करते हैं और रेखा खींचकर आगे बढ़ते हैं। इसमें असीम धैर्य और भक्ति की आवश्यकता होती है।
खड़ी कावंर में श्रद्धालु जब विश्राम करते हैं, तो कावंर को स्टैंड पर भी नहीं टांगते। उनके साथी कावंर को अपने कंधे पर थामे खड़े रहते हैं ताकि कावंर सदैव गतिमान या खड़ी अवस्था में रहे।
जो श्रद्धालु वृद्धावस्था, बीमारी या विदेश में होने के कारण प्रत्यक्ष रूप से 108 किमी नहीं चल सकते, वे बोल बम ऐप के माध्यम से शुद्ध भाव से मंत्र-संकल्प कर 3D जलार्पण और डिजिटल प्रमाण-पत्र प्राप्त करते हैं।