सुल्तानगंज से 92 किमी की कठिन पदयात्रा के बाद और देवघर से ठीक 16 किमी पहले स्थित है विश्व प्रसिद्ध घोरमारा (Ghormara)। यहाँ शुद्ध खोवे से बने ताजे इलायची पेड़े बाबा बैद्यनाथ के मुख्य प्रसाद के रूप में पूरे भारत में प्रसिद्ध हैं।
🌟 घोरमारा की ३ मुख्य विशेषताएं:
१. बाबा बैद्यनाथ का पावन पेड़ा भोग
देवघर जलार्पण के बाद अधिकांश कावंरिया भक्त घर वापसी के समय घोरमारा से ही अपने परिजनों और मित्रों के लिए शुद्ध पेड़े का प्रसाद खरीदते हैं।
२. अंतिम बड़ा विश्राम स्थल (Last Major Halt)
यहाँ सैकड़ों विशाल कावंरिया सेवा शिविर हैं जहाँ भक्त रात्रि विश्राम करते हैं और तड़के 3 बजे देवघर के लिए अंतिम 16 किमी का प्रस्थान करते हैं।
३. दुम्मा बॉर्डर (98 KM) व देवघर प्रवेश
घोरमारा से 6 किमी आगे दुम्मा बॉर्डर आता है, जहाँ से देवघर नगर की पावन सीमा प्रारंभ होती है।